बाल पीड़ितों के पुनर्वास एवं संस्थागत समन्वय की भूमिका : दुर्ग जिले के संदर्भ में एक अध्ययन
Keywords:
बाल उत्पीड़न, पुनर्वास, मानवाधिकार, बाल संरक्षण, संस्थागत समन्वय, पॉक्सो अधिनियम ।Abstract
बाल उत्पीड़न केवल एक विधिक अपराध नहीं है, बल्कि यह बालकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी है। उत्पीड़न की घटना के पश्चात् बाल पीड़ितों के समुचित पुनर्वास, मनोसामाजिक सहायता, शिक्षा-पुनर्संलग्नता तथा न्यायिक संरक्षण की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य दुर्ग जिले में बाल पीड़ितों को उपलब्ध कराई जाने वाली पुनर्वास सेवाओं एवं बाल संरक्षण संस्थाओं के मध्य समन्वय की प्रभावशीलता का अध्ययन करना है। अध्ययन में दुर्ग, धमधा एवं पाटन क्षेत्र के कुल 160 उत्तरदाताओं को सम्मिलित किया गया। अध्ययन से ज्ञात हुआ कि पुनर्वास सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता तथा संस्थागत समन्वय बाल पीड़ितों के न्याय एवं पुनर्वास को अधिक प्रभावी बनाते हैं।
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